माँ की मुस्कराहट- कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

माँ की मुस्कराहट- कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

माँ की मुस्कराहट- कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

पाना है खुदा की रहमत, तो नेकी कर आओ।
और सुकून पाना है जिंदगी में, तो माँ के साथ समय बिताओ।।

हर दुख हर तकलीफ़ मिटा देती हैं ।
मेरी माँ मेरे हर अच्छे बुरे में मुझे दुआ देती है ।।

उसके पास तालीम नहीं किताबों की फिर भी मुझे क़ाबिल बनाया ।
उसने कभी नई साड़ी नहीं ली पर मूझे भरपूर पढ़ाया ।।

जब भी बदन तपता है उसका , तो उसको काम की थकान बताती है ।
बेहाल होती है वो ज्वर से लेकिन ,मेरे लिया रोटियाँ बराबर बनाती है ।।

मैं अपनी चीजों के लिए माँ पर अक्सर चिल्ला देता हूँ ।
मगर अपने सुख के लिए मेरी माँ मुझपर आज तक नहीं चिल्लाई ।।

मौका पड़ता है तो मैं उसको उसके फ़र्ज़ गिना देता हूँ ।
पर हर मौके पर वो मेरे लिए मेरा कवच बन जाती है।।

हज़ार दिक्कतें चल रही हो मुझे एक भी नहीं बताती है ।
न जाने मेरी माँ में इतनी हिम्मत कहा से आ जाती है ।।

रातों की सुकून भरी नींद के लिए वो मेरा सर सहलाती है ।
मैं तो सो जाता हूँ , पर पता नहीं वो कुछ देर सो भी पाती है ।।

किसी मकान को घर और घर में परिवार बनाती है ।
हालात कुछ भी हो पर मेरी माँ हम सब के लिए सदा मुस्कुराती हैं ।।

-कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

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