याद हमारी उनकी आई न जाने कितनी बार

याद हमारी उनकी आई न जाने कितनी बार

याद हमारी उनकी आई ,
न जाने कितनी बार ।
तन्हाइयों से हुई लड़ाई ,
न जाने कितनी बार ।

वो मेहंदी वाली हाथो में ।
वो हंसी ठिठोली बातों में ।
इक अजब सा मंजर होता था ,
वो चाँदनी वाली रातों में ।

फिर पायल छनकाई , होश उड़ाई ,
न जाने कितनी बार ।
याद हमारी उनकी आई ,
न जाने कितनी बार ।

  • नए शहर थे , नए लोग थे ।
    हम थोड़े गुमनाम हुए ।
    सीने में बड़ा हलाहल हुआ ,
    जब हम थोड़े बदनाम हुए ।

दिल रोया , आंखे भर आईं ,
न जाने कितनी बार ।
याद हमारी उनकी आई ,
न जाने कितनी बार ।

नई हौसलें , नई उम्मीदें ।
अभी नई – नई उड़ाने थी ।
पर फैलाएं , उड़ न पाए ।
न जाने कितनी बार ।

– सचिन सार्थक

4 Comments

May 13, 2019

KHUSHWANT

Shaandar❤️⚠️🤘

May 13, 2019

Varsha pandey

Mind blowing… 😍😘😚

May 13, 2019

Vandana pandey

Supbb… 😌😊☺

May 13, 2019

Hitesh Verma

Nice one BRO😎

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