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तुम उस पार चली जाती

सच मे कितना अच्छा होता अगर तुम उस पार चली जाती , मैं इस पार नदी के तट पे बैठकर अपनी धुन में पुकारता तुम्हें तुम मेरी बातों को अनसुना कर अपनी नाराजगी जाहिर करती और कहती कि फ़ासले रखना इश्क में जरूरी है क्या ? तुम न बहुत जल्दी नराज हो जाती हो , […]

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याद हमारी उनकी आई न जाने कितनी बार

याद हमारी उनकी आई , न जाने कितनी बार । तन्हाइयों से हुई लड़ाई , न जाने कितनी बार । वो मेहंदी वाली हाथो में । वो हंसी ठिठोली बातों में । इक अजब सा मंजर होता था , वो चाँदनी वाली रातों में । फिर पायल छनकाई , होश उड़ाई , न जाने कितनी […]

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पाताल का मैं तारा हूँ

पाताल का मैं तारा हूँ

पाताल का मैं तारा हूँ। हारा हुआ, मारा हुआ हर ज़ख्म से छलनी हुआ खुद के नज़रो से गिरा हुआ सुनसान राहों का आवारा हूँ पाताल का मैं तारा हूँ। ना चाँद से कोई वास्ता तारो से ना ही रिश्ता हैं बुझा हुआ मशाल सा दर्द का मज़ाल सा धरती का मैं नकारा हूँ पाताल […]

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तबियत खराब रहने दो

तबियत खराब रहने दो

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शर्ट का कोना – कोना महक रही हो तुम

शर्ट का कोना – कोना महक रही हो तुम

किस किस के संग भटक रही हो तुम अब मेरी आँखों को खटक रही हो तुम ये शर्मों हया उसपे गुफ्तगू कि बोल कम ज्यादा अटक रही हो तुम मशलसल मंजिलो को चलती जाओगी बेशक रुक जाओ थक रही हो तुम इधर स्याह रात का आलम किससे कहूँ , उधर जुगनूं बन के चमक रही […]

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