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अपनी मोहब्बत का यह पैग़ाम लिखा है- Deepika

अपनी मोहब्बत का यह पैग़ाम लिखा है- Deepika

नज्म़ नज्म़ में तेरा बखान लिखा है । अपनी मोहब्बत का यह पैग़ाम लिखा है ।। तेरी आंखों की चमक हमें रास आ गई, होठों की वो मुस्कान कुछ कानों में कह गई । सुनहरे बालों का कुछ जादू सा चल गया, तेरे हुस्न-ओ-अदा पे कुछ फ़ना सा हो गया । हर्फ़ दर हर्फ़ फिर […]

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माँ की मुस्कराहट- कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

माँ की मुस्कराहट- कवि अंकित द्विवेदी “अनल”

पाना है खुदा की रहमत, तो नेकी कर आओ।और सुकून पाना है जिंदगी में, तो माँ के साथ समय बिताओ।। हर दुख हर तकलीफ़ मिटा देती हैं ।मेरी माँ मेरे हर अच्छे बुरे में मुझे दुआ देती है ।। उसके पास तालीम नहीं किताबों की फिर भी मुझे क़ाबिल बनाया । उसने कभी नई साड़ी […]

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माँ – Anadya

माँ – Anadya

आपसे मै इस जग में आई.. आप ही आप जो मुझ में समाई.. आप मेरे जीवन की आशा.. आपसे ही मेरी अभिलाषा.. आप मेरे जीवन की शक्ति.. आप ही ईश् आप ही भक्ति.. आपसे ही है मेरी काया.. कड़ी धूप में ठंडी छाया.. आप खुश तो घर में खुशहाली.. आपसे ही होली दीवाली.. सबसे प्यारी […]

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ख़ुशनसीब थे वो जो इस भंवर से निकल गए- Prakhar Pandey ‘Adil’

ख़ुशनसीब थे वो जो इस भंवर से निकल गए- Prakhar Pandey ‘Adil’

ख़ुशनसीब थे वो जो इस भंवर से निकल गए ये वही हैं जो दुनिया की बहर से निकल गए सफर में निकले हैं तो कहीं तो पहुँचेंगे यही सोचकर अक्सर हम घर से निकल गए उन दोनों का सिलसिला मरते मरते मर गया वो लोग जो एक दूसरे के अंदर से निकल गए अब जो […]

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एहसास- मिना नाज़ क़ादरी (माही)

एहसास- मिना नाज़ क़ादरी (माही)

c वो लफ़्जो की तिजारत थी और ये दिल कुछ और समझा था उसे हंसने की आदत थी और ये दिल कुछ और समझा था मझे उसने कहा आओ नई दुनिया बसाते हैं उसे सूझी शरारत थी और ये दिल कुछ और समझा था हमेशा उसकी आंखों में धनक से रंग रहते थे ये उसकी […]

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माँ- शीतांशु मणि

माँ- शीतांशु मणि

मेरे जन्म के बाद नर्स ने मुझे मां की गोद में फरमाया,पर मुझे लगा कौन सा मखमल के बिस्तर पर सुलाया ।जब मैं बड़ा हुआ तो मुझे दुनिया ने ये बात बताया,अरे पागल वह मखमल का बिस्तर नहींतेरी मां के दोनो हाथो पर तुझे नर्स ने सुलाया.।। किसी की नजर ना लगे इसलिये, उन्होंने तुझे […]

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नूह की कश्ती- Shahid Ansari

नूह की कश्ती- Shahid Ansari

मैंचादर के एक हिस्से से जुड़ा, लटका हुआ हूँ, आकाश और पाताल के बीच । जहाँ मैं हूँ , वहाँ कोई आना नहीं चाहता, कपड़े का वो छोटा सा सिरा जिसके सहारे मैं टिका हुआ हूँ, वो टूटेगा तब जब उसे नहीं टूटना चाहिए । पर मेरे कहने से क्या होता है? क्या नूह की […]

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कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया- Sahir Ludhianvi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया- Sahir Ludhianvi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया कौन रोता […]

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बढ़े चलो! बढ़े चलो!      -सोहनलाल द्विवेदी

बढ़े चलो! बढ़े चलो! -सोहनलाल द्विवेदी

न हाथ एक शस्त्र हो न हाथ एक अस्त्र हो, न अन्न, नीर, वस्त्र हो, हटो नहीं, डटो वहीं, बढ़े चलो! बढ़े चलो! रहे समक्ष हिमशिखर, तुम्हारा प्रण उठे निखर, भले ही जाए तन बिखर, रुको नहीं, झुको नहीं बढ़े चलो! बढ़े चलो! घटा घिरी अटूट हो, अधर में कालकूट हो, वही अम्रत का घूँट […]

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