Archives

तुम उस पार चली जाती

सच मे कितना अच्छा होता अगर तुम उस पार चली जाती , मैं इस पार नदी के तट पे बैठकर अपनी धुन में पुकारता तुम्हें तुम मेरी बातों को अनसुना कर अपनी नाराजगी जाहिर करती और कहती कि फ़ासले रखना इश्क में जरूरी है क्या ? तुम न बहुत जल्दी नराज हो जाती हो , […]

Read More

याद हमारी उनकी आई न जाने कितनी बार

याद हमारी उनकी आई , न जाने कितनी बार । तन्हाइयों से हुई लड़ाई , न जाने कितनी बार । वो मेहंदी वाली हाथो में । वो हंसी ठिठोली बातों में । इक अजब सा मंजर होता था , वो चाँदनी वाली रातों में । फिर पायल छनकाई , होश उड़ाई , न जाने कितनी […]

Read More
माँ- शीतांशु मणि

माँ- शीतांशु मणि

मेरे जन्म के बाद नर्स ने मुझे मां की गोद में फरमाया,पर मुझे लगा कौन सा मखमल के बिस्तर पर सुलाया ।जब मैं बड़ा हुआ तो मुझे दुनिया ने ये बात बताया,अरे पागल वह मखमल का बिस्तर नहींतेरी मां के दोनो हाथो पर तुझे नर्स ने सुलाया.।। किसी की नजर ना लगे इसलिये, उन्होंने तुझे […]

Read More
नूह की कश्ती- Shahid Ansari

नूह की कश्ती- Shahid Ansari

मैंचादर के एक हिस्से से जुड़ा, लटका हुआ हूँ, आकाश और पाताल के बीच । जहाँ मैं हूँ , वहाँ कोई आना नहीं चाहता, कपड़े का वो छोटा सा सिरा जिसके सहारे मैं टिका हुआ हूँ, वो टूटेगा तब जब उसे नहीं टूटना चाहिए । पर मेरे कहने से क्या होता है? क्या नूह की […]

Read More