Monthly Archives: November 2018

मै औरत हूँ

मै औरत हूँ

हाँँ मैं औरत हूँ। मै कमजोर नही मै लाचार नही ना मैं कोमल सिसकती हुई कली हूँ। मुसलसल रोको मत तुम मुझे। ख़ुदा की बनाई इनायत हूँ मैं क्या तुम रोक पाओगे? मै शक्ति का एहसास हूँ। मै उसकी बनाई चीज सबसे खास हूँ। क्या मैं घबरा जाऊँगी? ऐ पुरुष किस बात के पौरुष पे […]

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मै प्रेमी हूं- Afzaal Ashraf Kamaal

मै प्रेमी हूं- Afzaal Ashraf Kamaal

आज के इस दौर में, दौर, जो चुनावों का है, चुनाव, जो नेताओं का त्यौहार होता है, नेता, जो सिर्फ राजनीति करते हैं राजनीति तो आजकल हर कोई कर रहा है।   आपके और मेरे अगल बगल में बैठे लोग लोग, जो आपके अपने हैं, लोग जो आपको बेहद प्रिय हैं, लोग जो आपको अपना […]

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Tribute: Dushyant Kumar – सलाम: दुष्यंत कुमार

Tribute: Dushyant Kumar – सलाम: दुष्यंत कुमार

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं […]

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अमिट यादें तेरी

अमिट यादें तेरी

प्रेम प्रसंग की बातें झूठी मिलने की अब आस भी टूटी संस्मरण को आधार बनाकर जीवंत बना रखा है तुम्हारे नाम को विकल ह्रदय है तुमसे मिलने फाल्गुन की इस सुनहरी शाम को। नभ में सुसज्जित तारक दल संग चांद उदित होकर फिर नभ में उत्कंठा की ज्योति जलाकर याद तुम्हारी है कण कण में […]

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Farmaan E Fakir- Indranil Nandi

Farmaan E Fakir- Indranil Nandi

“फिलहाल तो इसे हवा का झोंका ही समझलों, आँधी तो तब कहते जब ये हमे दो कदम पीछे ले जाती।” ********** “तू चक्कर काटती मस्जिद की, मैं चक्कर काटता मंदिर का। सही कहते हैं लोग, ‘चक्कर चल रहा इनका’।”

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मुसाफ़िर

मुसाफ़िर

सुन ओ रास्ते से जाते मुसाफ़िर मुझे भी साथ तू ले चल मुसाफ़िर, साथ-साथ तय कर लेंगे ये सफ़र, दो ही पल साथ अपने मुझको ले-ले आज ज़रा, ओ मुसाफ़िर, यादों के कुएँ से निकाल पियेंगे पानी ख़्वाहिशों के पथ पर बढ़ेंगे हम साथी, सुकून के गाँव में गुज़ारकर इक हसीं रात दोस्ती की कसमें […]

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एहसास मोहब्बत का फिर से

एहसास मोहब्बत का फिर से

एहसास मोहब्बत का फिर से फिर से इस दिल को किसी अजनबी की यादो ने घेड़ा है फिर से इस दिल को किसी नवागत की मस्ती ने छेड़ा है फिर से किसी रूप की परी को देख दिल ने ली अंगड़ाई है फिर से किसी की कल्पना में दिल में अजीब दुस्वारी है एहसाह मोहब्बत […]

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लखनऊ- Afzaal Ashraf Kamaal

लखनऊ- Afzaal Ashraf Kamaal

#लखनऊ लखनऊ से प्यार है मुझे, ज़िन्दगी के एक साल बिताये हैं वहां पर, ज़िन्दगी की उठापटक ने दिल्ली में ला पटका, पर फिर भी यहाँ जब भी कोई मिलता है तो उसे बिठा के लखनऊ के किस्से सुनाने लगता हूँ. बताता हूँ उसे लखनऊ के तहज़ीब के बारे में, बताता हूँ लखनऊ की मेहमाननवाज़ी […]

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कौन हो तुम?- Afzaal Ashraf Kamaal

कौन हो तुम?- Afzaal Ashraf Kamaal

She- कौन हूँ मैं? Me: सप्ताह के 6 दिन जीतोड़ काम करने के बाद इतवार को मिलने वाला सुकून हो तुम। हर रोज़ 5 बजे उठ काम पर जाने की जल्दी के बाद किसी दिन 12 बजे तक सोने पर मिलने वाला चैन हो तुम। 4 दिन के किसी भूखे को जब खाना मिलता है […]

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