Monthly Archives: April 2019

कोई पार नदी के गाता!- Harivansh Rai Bachchan

कोई पार नदी के गाता!- Harivansh Rai Bachchan

कोई पार नदी के गाता! भंग निशा की नीरवता कर,इस देहाती गाने का स्वर,ककड़ी के खेतों से उठकर, आता जमुना पर लहराता!कोई पार नदी के गाता! होंगे भाई-बंधु निकट ही,कभी सोचते होंगे यह भी,इस तट पर भी बैठा कोई उसकी तानों से सुख पाता!कोई पार नदी के गाता! आज न जाने क्यों होता मनसुनकर यह एकाकी गायन,सदा […]

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गिरते – पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो

गिरते – पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो

गिरते- पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो इस जमाने मे भी तुम प्यार करते हो। चाँद अगर हैं भी सामने, तो नजर झुका के रखो तेरी औकात नही हैं की आँखे चार करते हो। इन्ही फिज़ाओ मे शामिल हैं ख़ुशबू उसकी इन्ही फिज़ाओ के मुकाबिल रुख यार करते हो। दरमियाँ अब फासले मिटेंगे नही कभी […]

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वहीं आके मिलेंगे मैं और तु

वहीं आके मिलेंगे मैं और तु

जहाँ इश्क़ न हो, हो जुनून वहीं आके मिलेंगे मैं और तू हम मिलेंगे वहाँ तो बहारें भी होंगी उछलती मस्तियों सी नज़ारे भी होंगी होंगी वहाँ पे झिलमिल सितारे दबी सि हँसी मे हाँ हमको पुकारे कोयल की कू – कू से गूंजेगी महफ़िल जहाँ न होगा कोई भी संगदिल तु देखे इधर मैं […]

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