Monthly Archives: May 2019

शायद तुम बहुत जल्द भूल जाती हो-शीतांशु मणि

शायद तुम बहुत जल्द भूल जाती हो-शीतांशु मणि

तुम्हारी यादें तो मुझे बहुत आती है शायद तुम बहुत जल्द भूल जाती हो किस कदर तुम से बातें करता था,पुरा दिन तेरी ही आवाज सुनता रहता था ।।बातों-बातों में हमेशा लड़ता था,शायद ही कभी प्यार भरी बातें करता था ।। तेरी चोटी को खींचकर तुझे गुस्सा करता था,फिर तेरी आंखों में आंखें डालने से […]

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तुम उस पार चली जाती

सच मे कितना अच्छा होता अगर तुम उस पार चली जाती , मैं इस पार नदी के तट पे बैठकर अपनी धुन में पुकारता तुम्हें तुम मेरी बातों को अनसुना कर अपनी नाराजगी जाहिर करती और कहती कि फ़ासले रखना इश्क में जरूरी है क्या ? तुम न बहुत जल्दी नराज हो जाती हो , […]

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वो एक रात- Aastha Singh

वो एक रात- Aastha Singh

वो एक रात जिसमे सिमटी हुई हैं मेरी पूरी जिंदगीवो एक रात जब मुकम्मल हुई थी हमारी दास्तानवो एक रात जब सिर्फ मैं और तुम मिले थे या फिर मिली थी पूरी कायनातकाश वो एक रात फिर से आए वो एक रात जब चांद इस फलक पे कुछ ज्यादा ही चमक रहा था वो एक […]

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तुम ये लफ्ज़ बर्दाश्त नही कर पाओगे-  कथाकार

तुम ये लफ्ज़ बर्दाश्त नही कर पाओगे- कथाकार

ना सुनो मुझे, क्योंकि ये लफ्ज़ तुम बर्दाश्त नही कर पाओगे,और अगर सुन रहे हो तो आंखे बंद रखना क्योंकि तुम अपने आप से नज़र मिला नहीं पाओगे।और अगर आंखे भी खुली है, तो दिल कठोर कर लेना,वर्ना सही गलत में तुम भी फ़र्क़ करने लग जाओगे।….ना सुनो मुझे, क्योंकि ये लफ्ज़ तुम बर्दाश्त नही […]

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वह मेरा गुरु मेरी शान है- अंकित द्विवेदी

वह मेरा गुरु मेरी शान है- अंकित द्विवेदी

लोगों को सिखाता पुरुषार्थ है, जो बनता श्रेष्ठता का भावार्थ है। जिसने कलम चलाई तो कुछ गज़ब ही लिखा , वो जब भी मिला उदित ही दिखा । जिसने युवाओं का किया आह्वान है , वो मेरा गुरु मेरी शान मेरी शान है ।।01 जिसने सिखाया जिम्मेदार बनो, पहले खुद से लड़ो और इंसान बनो […]

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बेटी- Aastha Singh

बेटी- Aastha Singh

माँ मैं इस जहाँ मे आना चाहती हूँ तेरे घर के आंगन मे खिलखिलाना चाहती हूँ तितलियों से रंग उधार मांगकर रंग बिरंगे पंख बाँधकर इस नीले से आसमान के तले इधर – उधर, डाल – पात ,आंगन – छत ,यहाँ – वहाँ चिड़ीयों सी चहचहाना चाहती हूँ माँ मैं इस जहाँ मे आना चाहती […]

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विछोह की पीड़ा- सौरभ कुमार ठाकुर

विछोह की पीड़ा- सौरभ कुमार ठाकुर

पता नही किस शहर में, किस गली तुम चली गई। मै ढूँढ़ता रह गया,तुम छोड़ गई । पता नही हम किस मोड़ पर फिर कभी मिल पाएँगे । इस अनूठी दुनिया में फिर किस तरह से संभल पाएँगे । पता नही तेरे बिन हम, जी पाएँगे या मर जाएँगे । हम बिछड़ गए उस दिन,जिस […]

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मेरा गांव बहुत बदल सा गया है..(लघुकथा) – शीतांशु मणि

मेरा गांव बहुत बदल सा गया है..(लघुकथा) – शीतांशु मणि

बहुत बदल सा गया है हमारा गाँव, शायद मुझे तो इससे जलन गयी है । वो आसमा मे तैरने वाला बादल भी शायद खफा हो गया है, सुबह की आगोश में चिड़ियों की चहचहाती खनक मेरी कानो को खटक सी रही हैं। सुबह की सुरज की खुबसुरती पे भी ना जाने क्यो धुँधलापन नजर आ […]

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Nightmare- Aastha Singh

Nightmare- Aastha Singh

You know what? I hate you yes I do ! But do I actually ? You broke me into thousands possible pieces you could but you know what? My shoulders still craves for your warmthMy heart still craves for that love you gave me for a particular secondYou know that second means the world to […]

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याद हमारी उनकी आई न जाने कितनी बार

याद हमारी उनकी आई , न जाने कितनी बार । तन्हाइयों से हुई लड़ाई , न जाने कितनी बार । वो मेहंदी वाली हाथो में । वो हंसी ठिठोली बातों में । इक अजब सा मंजर होता था , वो चाँदनी वाली रातों में । फिर पायल छनकाई , होश उड़ाई , न जाने कितनी […]

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