Home

गिरते – पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो

गिरते – पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो

गिरते- पड़ते लफ्ज़ो पे ऐतबार करते हो इस जमाने मे भी तुम प्यार करते हो। चाँद अगर हैं भी सामने, तो नजर झुका के रखो तेरी औकात नही हैं की आँखे चार करते हो। इन्ही फिज़ाओ मे शामिल हैं ख़ुशबू उसकी इन्ही फिज़ाओ के मुकाबिल रुख यार करते हो। दरमियाँ अब फासले मिटेंगे नही कभी […]

Read More
वहीं आके मिलेंगे मैं और तु

वहीं आके मिलेंगे मैं और तु

जहाँ इश्क़ न हो, हो जुनून वहीं आके मिलेंगे मैं और तू हम मिलेंगे वहाँ तो बहारें भी होंगी उछलती मस्तियों सी नज़ारे भी होंगी होंगी वहाँ पे झिलमिल सितारे दबी सि हँसी मे हाँ हमको पुकारे कोयल की कू – कू से गूंजेगी महफ़िल जहाँ न होगा कोई भी संगदिल तु देखे इधर मैं […]

Read More
जब दिख जाए आपकी गुलाबी आँखे 

जब दिख जाए आपकी गुलाबी आँखे 

    जब दिख जाए आपकी गुलाबी आँखे कुछ न दिखता उस मंज़र से आगे।   घुम रही थी वो हाथो मे लेकर रख दिया हमने भी दिल अपना उस खंजर के आगे।   इस जहाँ मे क्या रखा हैं परिंदे चलो चलें हम उस अंबर के आगे ।   कब तक टहलते रहोगे किनारे […]

Read More
Soldier’s wife love

Soldier’s wife love

डर था कि नहीं आओगे मगर भरोसा था या तो जीत कर आओगे , या तिरंगे में लिपटे हुए गर्व से आओगे … आज भी तुम्हारी शर्ट से खुशबू सी आती है , आज भी तुम्हारे पास होने का एहसास कराती है … फ़र्ज़ के आगे मेरा प्यार कुछ नही तुम्हारी और मेरी नन्ही सी […]

Read More
प्यार भले न था आँखो मे हिकारत भी नही थी

प्यार भले न था आँखो मे हिकारत भी नही थी

प्यार भले न था आँखो मे हिकारत भी नही थी हाँ मगर उसके देखने मे वो शरारत भी नही थी। रुख़्सार पे लटक आई जुल्फों को हटा दिया हमने मगर इस मर्तबा उसकी इजाजत भी नही थी। हलवानी सी उसकी आँखे को निहारते रहे जनाब इससे आगे बढ़ने की हमारी हिमाकत भी नही थी। शाकिर […]

Read More
वो देखने आई थी अपने आशिक को आख़िरी दफा 

वो देखने आई थी अपने आशिक को आख़िरी दफा 

वो देखने आई थी अपने आशिक को आख़िरी दफा अभी तक महक रही हैं ईट उस मज़ार का। पालकी मे बैठीं कौन हैं वो ? की सिर्फ उसके खुशबू से मदमस्त हुआ जा रहा हैं रूह भी कहार का। वो टूटा भी अगर तो कयामत थोरि न बरप गई खिलौना ही तो था वो आपके […]

Read More
तुम

तुम

मेरा होना भी तुम मेरा खोना भी तुम मेरा रास्ता भी तुम मेरी मंजिल भी तुम मेरा साहस भी तुम मेरा डर भी तुम मिलन की रात भी तुम विरह की आग भी तुम चाँद की नरमी भी तुम सूरज की गरमी भी तुम प्रीत भी तुम संगीत भी तुम इस जग की सुंदर रीत […]

Read More
उजर गई तमन्नाओं की एक बुत आशियाने मे 

उजर गई तमन्नाओं की एक बुत आशियाने मे 

उजर गई तमन्नाओं की एक बुत आशियाने मे सजाई थी जिन्हें हमने कई जमाने मे उन्हें हमारा ख्याल भी नही रहा शायद हमे तो वो और याद आते रहे भूल जाने मे मोहब्बत तो फ़कत हमारे तरफ से ही रही उन्होंने तो गवायाँ वक़्त हमे आजमाने मे सारे खत उनके दरिया मे बहा आये हम […]

Read More
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया- Sahir Ludhianvi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया- Sahir Ludhianvi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया कौन रोता […]

Read More
किसी के नज़्मों मे गजलो मे फिर से छा रही होंगी

किसी के नज़्मों मे गजलो मे फिर से छा रही होंगी

किसी के नज़्मों मे गजलो मे फिर से छा रही होंगी मुझे यकीन हैं शायद वो फिर से आ रही होगी सच तो ये हैं की भूल चुका हूँ मैं उसे वो किसी और के दिल को धरका रही होगी अफसुर्दा से इन रातों का आलम किसे कहे शबे ए वस्ल मे वो जुगनू बनके […]

Read More