याद- मिना नाज़ (माही)

मैंने देखा था उन दिनों मे उसे जब वो खिलते गुलाब जैसा था उसकी जुल्फों से भीगती थी घटा उसका रुख़ माहताब जैसा था लोग पढ़ते थे खाल-आे-खत उसके वो…

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ख़ुशनसीब थे वो जो इस भंवर से निकल गए- आदिल

ख़ुशनसीब थे वो जो इस भंवर से निकल गए ये वही हैं जो दुनिया की बहर से निकल गए सफर में निकले हैं तो कहीं तो पहुँचेंगे यही सोचकर अक्सर…

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