School Trip- Priyanka Kashyap

School Trip- Priyanka Kashyap

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टीचर हिमांशु से ये पूछती है ‘हिमांशु तुम्हें नहीं जाना क्या ट्रिप पर?, हिमांशु तभी जोर से जवाब देता है ‘क्यों नहीं मिस’।
‘गुम कहां हो जब से क्लास में आये हो सो रहे हो’ तभी हिमांशु के बगल से एक आवाज आती है l
नहीं मिस ये अभी से ट्रिप में खो गया है l सारी क्लास हिमांशु पर हंसने लगती है l हिमांशु तभी रवि पर गुस्सा होते हुए बोलता है तुझे में छोड़ूगा नहीं रवि के बच्चे l रवि और हिमांशु बहुत अच्छे दोस्त हैं l भाई हिमांशु तुझे फोटोग्राफी का इतना शोक है कि जब भी कोई ट्रिप का नाम लेता है तू तो खो सा जाता है l हाँ यार तुझे पता है न मुझे बड़ा होकर एक बहुत बड़ा फोटोग्राफी बनना बना है रात भर हिमांशु को नींद नहीं आती है ट्रिप कि अगली सुबह आ ही गई जिसका हिमांशु को इंतजार था बस में बैठने के बाद भी हिमांशु को बेचैनी होती है कब हम नैनीताल पहुचेंगे, जैसे ही नैनीताल पहुंचे अभी सब बस में से उतरने ही वाले होते है कि हिमांशु बस से सबसे पहले अपना कैमरा हाथ में ले उतर जाता है उसे लगता है सब उसके पीछे है और फोटो खींचते – खींचते वह बहुत आगे निकल आता है और खो जाता है रास्ता ढूढ़ने के चक्कर में उसे काफी चोट भी लग जाती है, और जोर -जोर से बच्चों कि तरह रोने लगता है।
तभी वहां एक लड़की आती है जो हिमांशु को देख जोरों से हँसने लगती है l हिमांशु को गुस्सा आ जाता है तुम हंस क्यों रही हो l तुम जो बच्चों कि तरह रो रहे हो ऐसे भला कोई रोता है क्या? तो में क्या करू में खो गया हूँ मेरे घुटने में भी काफी चोट आ गई है और बहुत दुख रहा है अब में अपने घर कभी वापस नहीं जा पाउँगा मम्मी – मम्मी का नाम ले चिलाने लगता है l लड़की बोलती है चुप एक दम पैर यहां लाओ गोलू मोलू, तुम भी बुरी हो बाकी लड़कियों कि तरह वो भी मुझे गोलू – मोलू बोलती है और कोई मुझसे बातें नहीं करती मैं मोटा हूँ न, अरे नहीं तुम तो क्यूट हो l सच्ची! तुम झूठ बोलती हो, लड़की बोलती है नहीं और हिमांशु को बातों में उलझा के वह लड़की हिमांशु और उसकी पैर कि मोच और घुटने पर लगी चोट पर जंगल कि जड़ी और अपना रुमाल बांध देती है हिमांशु को उस लड़की में अपनी एक नई दोस्त दिखती है वो नाम पूछता है लड़की बोलती है में अजनबी को अपना नाम नहीं बताती, तो मेरा नाम नहीं जानना ,हाँ क्यों नहीं गोलू- मोलू, फिर गोलू मोलू वैसे तुम बुला सकती हो में तुम्हे कुसुम बुलाऊं चलेगा ।हिमांशु तो कुसुम नाम इसलिए देता है कि उसने उसकी मदद कि और वो फूल कि तरह नाजुक सी लगती है उसेl
लड़की बोलती है हाँ बिल्कुल l फिर हिमांशु बोलता है नहीं कुसुम नाम ठीक नहीं तुम जंगल में मिली तो जंगली l क्या में जंगली दिखती हूँ कुसुम ठीक था l नहीं जंगली लड़की बोलती है ठीक है लेकिन उस लड़की का नाम कुसुम ही रहता है, लड़की कहती है फिर में तुम्हे अजनबी बुलाऊंगी।
हिमांशु बोलता है ठीक है, पर तुम जंगल में क्यों रहती हो ?नहीं पास के गाव में रहती हूँ, घर में खाना बनाने के लिए लकड़ियां खत्म हो गई थी वही लेने आई थी l अच्छा मुझे लगा की जंगली ;जंगल में रहती होगी l सुनो जंगली क्यों न हम निशानी के तौर पर एक दूसरे कि वॉच बदल लेते है ताकि जब भी हम मिले एक दूसरे को पहचान सके l हिमांशु अपनी आँखों नमी को छुपते हुए गहरी सांस लेकर कहता है कि जब में एक कामयाब फोटोग्राफी बन जाऊंगा तब तुमसे मिलने आऊंगा ये मेरा वादा हैl कुसुम भी हाँ कर देती है, कुसुम हिमांशु को जंगल से निकाल उसकी बस तक पहुंचा कर आती है हिमांशु बोलता है इंतज़ार करना मेरा जल्द आऊंगा कुसुम मुस्कुरा देती है और कुसुम कि नजरें बस हिमांशु को ही देखती रहती है जब तक बस उसके आँखों से आगे से ओझल नहीं हो जाती वो वंहा से नहीं जाती है, उसकी दिल कि धड़कने भी रुकने का नाम नहीं लेती है l

देखते -देखते पूरे 8 साल बीत जाते है और, यहाँ कुसुम रोज 8 बजे पेड़ के पास आ कर हिमांशु का इंतज़ार करती है उस पेड़ पर कुसुम ने गोलू -मोलू और हिमांशु ने जंगली लिखा होता है वक्त के साथ हिमांशु को ले कुसुम कि मोहब्बत बढ़ने लगती है उसे पूरा भरोसा रहता है कि उसका गोलू -मोलू आएगा और उसे अपने साथ ले जायेग,
और यहां हिमांशु अपने सपनों में इस कदर खो जाता है कि वो कुसुम को भूल जाता है फिर एक दिन जब उसके ऑफिस से उसे फोटोग्राफी के लिए नैनीताल भेजा जाता है तो उसे उसकी जंगली याद आ जाती है वो अपने दोस्त रवि को जंगली के बारे में बताता है तो रवि कहता है छोड़ना अब तो उसकी शादी भी हो गई होगी भूल जा उसे बहुत लड़कियां मिलेगी l हिमांशु ट्रिप पर चला जाता है जब फोटो लेते है तो उसके कैमरे में एक लड़की कि फोटो आ जाती है वो उसके पीछे जाता है देखता है वो लड़की बहुत खूबसूरत होती है उसे लड़की से पहली नजर में ही मोहब्बत कर बैठता है पर उसे कुसुम से किया हुआ वादा याद आ जाता है और वो हर दिन फोटो लेने के बहाने उस लड़की को देखने आता आज इत्तफाक से वही तारिख थी जिस दिन हिमांशु और कुसुम पहली बार मिले थे बस साल बदला था हिमांशु उस लड़की से पूछता है तुम रोज सुबह यहाँ आकर क्या करती हो, में किसी का इंतजार करती हूँ ।अच्छा आप यहाँ क्यों आते ? ऐसे ही ये जगह मुझे बहुत पसंद है बहुत सकून है इस जगह में l जैसे ही लड़की जाने लगती है उसकी वॉच और हिमांशु कि वॉच एक दूसरे में फंस जाती है और दोनों एक दूसरे को पहचान जाते हो दोनों एक दूसरे को प्यार भरी निगाहों से देखने लगते है l

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