बलिया को देखने का एक अलग नज़रिया देगी ‘बाग़ी बलिया’
दोनों तस्वीरें सत्य व्यास के फेसबुक प्रोफाइल से उठायी गयीं हैं।

बलिया को देखने का एक अलग नज़रिया देगी ‘बाग़ी बलिया’

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दिल्ली दरबार, बनारस टॉकीज़ और चौरासी के बाद इस बार सत्य व्यास बागी बलिया के साथ हाज़िर हुए हैं। हमने किताब पढ़ ली है तो सोचा कि किताब के बारे में आपको बता कर पुण्य कमा लिया जाए। ज्यादा वक़्त इधर-उधर की बातों में ना जाया करते हुए सीधा किताब पर आते हैं। ‘बागी बलिया’ उत्तर प्रदेश के पूर्व में स्थित बलिया जिला की पृष्ठभूमि पर आधारित है। बलिया; जो देश के आज़ाद होने से पहले खुद को आज़ाद करा चुका था, बलिया; जो प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की वजह से जाना जाता है, वो बलिया इतिहास के पन्नों पर सत्य व्यास की किताब बागी बलिया के लिए भी जाना जाएगा।

सत्य की इससे पहले पब्लिश हुई 3 किताबें

 

अब चूँकि इंट्रोडक्शन में मैंने इतिहास की बात की है तो आप ये समझने की भूत कतई मत कीजियेगा कि फिर से किसी लेखक ने इतिहास को अपने नज़रिये से बताने की कोशिश की है। ‘बागी बलिया’ छात्र राजनीति पर आधारित एक काल्पनिक उपान्यास है। बागी बलिया दो दोस्त संजय और रफ़ीक की कहानी है और इनके अलावा ढेरों किरदार अपना पक्ष मज़बूती से रखते हैं। किताब की कहानी बता कर मैं आपका मज़ा किरकिरा नहीं कर सकता इसीलिए इस किताब को क्यों पढ़ना चाहिए इसपर बात करते हैं।

1. चैप्टर्स के नाम बहुत ही खूबसूरत तरीके से रखे गए हैं, इस किताब के ज़रिये सत्य ने चैप्टर का नाम 1, 2 या 3 शब्दों में रखने की परंपरा को तोड़ा है। चैप्टर का नाम पढ़ते ही अनायास ही एक मंद मुस्कान आपके चेहरे पर दौड़ जायेगी। कुछ चैप्टर के नाम ऐसे हैं

“मोहब्बत तो हो जाती है, मोहब्बत की नहीं जाती
ये शोला खुद भड़क उठता है, भड़काया नहीं जाता।”

“किसी के इश्क़ में सब कुछ भुलाये बैठे हो
दुनियादारी भी कोई चीज़ हुआ करती है।”

“तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी,
यही मौत है और यही ज़िंदगानी।”

ऐसे 15 चैप्टर हैं तो आपको इस तरह के 15 क्रिएटिव शीर्षक भी देखने को मिलेंगे। सत्य ने पुराने और मशहूर लेखकों की पंक्तियों का बेहद ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया है। सत्य ने ग़ालिब, मखमूर देहलवी, कैफ़ी आज़मी साहब जैसे शायर को तर्पण दिया है। जो शेर गूगल करने पर नहीं मिलते हमने मान लिया की वो सत्य की खुद की उपज होगी।

2. जाति धर्म से ऊपर होती है दोस्ती:- सत्य की उपन्यास बागी बलिया का एक मुख्य किरदार हिन्दू है और दूसरा मुख्य किरदार मुस्लिम है। अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद वे कभी एक दुसरे को ऐसा महसूस नहीं होने देते हालांकि दोनों एक दुसरे पर वक़्त-वक़्त पर मीठा व्यंग ज़रूर करते हैं। एक प्रसंग आपको चौंका देगा जब रफ़ीक़ संजय का धर्म भ्रष्ट होने से बचा लेता है। वहीं दूसरी तरफ होली में संजय से ज्यादा मज़ा रफ़ीक़ लूट रहा होता है। उपन्यास से इतर ये राजनैतिक पार्टियों के लिए एक सन्देश हो सकता है कि सांप्रदायिक सौहार्द किसे कहते हैं। ये उपन्यास हर उस नेता को पढ़नी चाहिए जिसके लिए हिन्दू और मुस्लिम होने का मतलब केवल कट्टरता और वोट बैंक है।

3. गुदगुदाते हैं वन लाइनर्स:- अपने पहले की किताबों की तरह ही सत्य ने इस किताब में भी वन लाइनर्स का तगड़ा इस्तेमाल किया है। ये ना सिर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि समय-समय पर गुदगुदाने का काम भी करती हैं। रफ़ीक़ की दोस्ती के चक्कर में जब संजय हक़ीम साहब की क्लिनिक के पास होता है और उस समय जो प्रसंग घट रहा होता है उस समय आप हँसते-हँसते लोट-पोट हो सकते हैं। हाँ, एक बात और की इस किताब में मिलते जुलते शब्दों का भी बेहद बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है जैसे छात्रसंघ का चुनाव लड़ने के लिए रफ़ीक के फण्ड पर सवाल करने पर संजय बोल उठता है:
“फंड तो नहीं मिलेगा ! हाँ, उससे मिलता-जुलता जो शब्द है, वो ज़रूर मिल जाएगा”

4. वक़्त-वक़्त पर इमोशनल भी करती है किताब:- हँसते-हँसते कब बागी बलिया आपको रुला देगी आपको एहसास भी नहीं होगा। अगर आप बड़े इमोशनल हैं और साउथ की फिल्मों को देख कर भी रोने लगते हैं तब तो पढ़ते वक़्त रुमाल ले कर बैठना चाहिए। जो इमोशनल नहीं है उनकी भी पलकों के कोरों को गीला करने का माद्दा रखती है बागी बलिया।

और ना जाने कितने पॉइंट्स मैंने छोड़ दिए होंगे जिन्हे बताना ज़रूरी होगा। किताब अच्छी है और इसे पढ़ा जाना चाहिए। मैंने इसे किंडल पर पढ़ा और उसके बाद किसी को गिफ्ट करने के लिए पेपरबैक एडिशन भी मंगा लिया, मोदी जी कहते हैं न, ‘बुके नहीं बुक दीजिये’। देश में मंदी है तो ये किताब खरीद कर आप मंदी को दूर भगाने में अपने योगदान भी दे सकते हैं।

P.S:-पहली बार अफ़ज़ाल ने किताब पढ़कर वेबसाइट पर लिखा है, इससे पहले वे फेसबुक पर ये पुण्य करते थे। हमने अफ़ज़ाल से वादा लिया है अब से जितनी भी किताबें वो पढ़ेंगे उसके बारे में वेबसाइट पर ज़रूर लिखेंगे।

-Afzaal Ashraf Kamaal

This Post Has One Comment

  1. Amazing Review..

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