पीली सूट वाली लड़की

पीली सूट वाली लड़की

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मैं उसे हमेशा कहा करता था , की ये पीले रंग की सुट तुमपे बहुत अच्छी लगती हैं। तुम रोज़ ही यही पहन कर क्यों नही आती? वो हमेशा मुझे कह देती अगर मैं रोज़ पहन कर आने लगी तो तुम्हे अच्छी नही लगेगी, कोई भी चीज़ तभी अच्छी लगती हैं जब वो कभी कभी हो।

मैं उसे कहता, “ऐसा थोड़ी न होता हैं इस चांद को देखो तो कभी देखा हैं इसे बदलते हुए सनातन से ही इसी रूप मे आता हैं । इन गुलाबों को देखो तो न इनकी खुशबू बदली न रूप , क्या किसी को भी इनकी खूबसूरती मे कोई कमी लगी कभी।

देखो न तुम इन खेतो मे फैले हुए सरसो के फूलों को रोज़ ही पीले रंग से नहा कर आती हैं , क्या हुई कम इसकी खूबसूरती। मेरे इतना समझाने के बाद हमेशा की तरह वो कहती, जाओ तुम ! तुम शायर लोगो को बस बाते बनाना आता हैं , उसके बाद फ़िज़ा मे सिर्फ उसकी हंसी और मेरी खामोशी ठहर के रह जाती।

खैर वो इन्द्रधनुष के सातो रंगो को बदल- बदल कर पहनती रही । लेकिन मेरा पसंदीदा तो वही रहा ‘ उसके पीले रंग का सुट’

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