उसने खिड़की पे आ के बस इतना कहा था- मिना नाज़ क़ादरी

उसने खिड़की पे आ के बस इतना कहा था- मिना नाज़ क़ादरी

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उसने खिड़की पे आ के बस इतना कहा था,
दबे होठों से मुझे अलविदा कहा था।

ना कोई बात,न सलाम,ना दुआ,
उसने कुछ इस अंदाज से अलविदा कहा था।

मैं उसके लबों को देखता का देखता रह गया,
उसने मुझे उन्हीं से तीन बार अलविदा कहा था।

मैं जब तक उसके होठों से निकल पाता,
उसने खिड़की को भी अलविदा कहा था।

मैंने कुछ देर और ठहर के देखना चाहा उसे,
मगर शीशे पर भी पर्दा पड़ गया था।
– मिना नाज़ क़ादरी (माही)

Leave a Reply

Close Menu