डर लगने लगा है- वकी अल्लाह खान

डर लगने लगा है- वकी अल्लाह खान

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डर लगने लगा है

इस चमन में रहते हुए डर लगने लगा  है

मुझे अब इस मुल्क के रहनुमा से डर लगने लगा है

किसी की आवाज़ को दबाकर तुम जीत कैसे सकते हो

मुझे अब तुम्हारी हैवानियत का पता लगने लगा है

मुझे अब इस……..

किसी को अब इतना न सताओ कि चमन छोड़ दे

तुम ही होगे उसके कातिल यह कहने में डर लगने लगा है

क्यूँ लफ़्फ़ाज़ी पर उतर आये हो तुम

झूठे वादे करने वालों से डर लगना लगा है

मुझे अब इस ………

किसी दिन हम भी कतल कर दिए जाएंगे

अब हमको भी सच कहने में डर लगने लगा है।

मुझे अब इस………..

-वकी अल्लाह खान

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